धर्मान्तरण के विरोध में केंद्रीय सरना समिति की महिला अध्यक्ष निशा भगत ने अपना सर मुड़वाया।

आज दिनांक 12 12 2025, केंद्रीय सरना समिति केंद्रीय कार्यालय – 13. ए रांची के आरआईटी भवन न्यायालय परिसर द्वारा राजभवन लोक भवन के सामने एक दिवसीय महाधरना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में परिवर्तित आदिवासी जो अपने पूर्वजों की परम्परा संस्कृति को छोड़कर अन्य धर्मों की परंपरा और संस्कृति में विश्वास रखते हैं, चाहे वे हिंदू हों या मुस्लिम। सिख, जैन, बौद्ध या ईसाई धर्म को अपनाया गया है और एसटी ऐसे लोगों की अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची से आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं, निशा भगत की “विज्ञापित” करने की मांग के लिए राजभवन लोक भवन के सामने एक दिवसीय महाधरना कार्यक्रम की मांग करते हुए ऐसे लोगों की अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची से लाभ उठा रहे हैं। कार्यक्रम में मुंडन समारोह किया गया लोहरदगा गाला हजारीबाग चतरा रामगढ़ पीटी बंगाल, उड़ीसा, बोकारो और रांची कांके, पिठोरिया, नामकोम, हटिया, मंदार, बेदो, इतकी आदि के विभिन्न क्षेत्रों में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। केंद्रीय सरना कमेटी के केंद्रीय अध्यक्ष फुलचंद तिर्की ने कहा कि आज प्राकृतिक पुजारी सरना आदिवासी जो परंपरागत परंपरा, संस्कृति, उनकी परंपरा, अधिकार, अधिकार का चौतरफा पालन कर रहे हैं। दूसरी ओर, कुर्मी/कुडमी आदिवासियों का लाभ लेने के लिए, परिवर्तित ईसाई मिशन पहले से ही अनुसूचित जनजातियों का लाभ उठाकर मूलनिवासी आदिवासियों पर अतिक्रमण कर रहे हैं, उन्होंने मांग की है कि अनुच्छेद 341 के तहत भारत के संविधान के (एससी) समाज के लोग यदि किसी अन्य धर्म में ईसाईयों के पास जाते हैं, तो उनकी अनुसूचित जातियों का लाभ स्वतः समाप्त हो जाता है, लेकिन अनुच्छेद 342 के तहत जो आदिवासी अपनी धर्म संस्कृति छोड़कर ईसाई या मुसलमान बन जाते हैं, फिर भी उन्हें ईसाई या मुसलमान

आदिवासी का लाभ (अनुसूचित जनजाति) का लाभ मिल रहता है। केन्द्रीय सरना समिति केन्द्र सरकार से मांग करती है कि अनुच्छेद 342 को सशोधन करते हुए मूल आदिवासियों को उनका अधिकार दिया जाए।
केन्द्रीय सरना समिति के महिला अध्यक्ष नीशा भगत ने कहा कि आज मैं आदिवासी समाज की बेटी अपने आदिवासी समाज को जगाने के लिए एवं केन्द्र सरकार को डिलिस्टंग की मांग को ध्यान आकृष्ट करने के लिए मैंने अपने बाल आदिवासी परम्परा संस्कृति के अनुसार कराया एवं यह बताने का प्रयास किया कि ईसाई समुदाय का परम्परा संस्कृति आदिवासी परम्परा संस्कृति जन्म संस्कार से लेकर मृत्यु संस्कार से कोई मेल नहीं खाता, केवल आदिवासी का लाभ लेने के लिए आदिवासी होने का ढोंग कर रहे इसलिए धर्मातरित लोगों का डिलिस्टिंग होना अनिवार्य है। केंद्रीय सरना समिति की केंद्रीय प्रवक्ता एंजेल लकड़ा ने कहा कि आदिवासिओ के हक अधिकार धार्मिक और संस्कृति पहचान को बचाए रखने के लिए जागरूकता अभियान जारी रहेगी और साथ ही केंद्रीय सरकार से निवेदन है कि जल्दी ही आदिवासिओ केधार्मिक अधिकार के लिए सरना धर्म कोड को लागू करे ।कार्यक्रम के बाद राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया एवं राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री को भेंट स्वरूप, निशा भगत का बाल भेजा गया कार्यक्रम में निम्नलिखित लोग शामिल हुए -संजय तिर्की, अमर तिर्की, एंजेल लकड़ा,निरा टोप्पो, प्रमोद एक्का, बिनय उरांव, पंचम तिर्की, सोहन कच्छप, हंदु भगत।

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