इंसानियत का कोई भूगोल नहीं होता, अन्याय के खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ एक है” – मोहम्मद शाहिद अय्यूबी

झारखंड मुस्लिम युवा मंच’ के अध्यक्ष मोहम्मद शाहिद अय्यूबी ने वैश्विक और क्षेत्रीय अशांति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए एक साझा मानवीय संकल्प की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि दुनिया में कहीं भी हो रहा अन्याय, मानवता के विरुद्ध अपराध है और इसके खिलाफ चयनात्मक (Selective) होने के बजाय हमें एकजुट होना होगा।

सरहदों से परे साझा दर्द: प्रेस को संबोधित करते हुए शाहिद अय्यूबी ने कहा, “चाहे वह फिलिस्तीन की लहूलुहान जमीन हो, जहाँ मासूमों की चीखें पूरी दुनिया के इंसाफ को ललकार रही हैं, या बांग्लादेश में भय के साये में रह रहे अल्पसंख्यक परिवार—न्याय और सुरक्षा पर हर इंसान का बराबर हक है। हम ढाका से लेकर गाजा तक, हर उस मजलूम के साथ खड़े हैं जिस पर जुल्म हो रहा है।”

बहुसंख्यक समाज की ऐतिहासिक जिम्मेदारी: अय्यूबी ने भारत की साझा संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान इस बात से होती है कि वहाँ का बहुसंख्यक समाज अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए कितनी मजबूती से खड़ा होता है। उन्होंने कहा, “जब बहुसंख्यक वर्ग अल्पसंख्यकों की ढाल बनता है, तो नफरत की दीवारें खुद-ब-खुद ढह जाती हैं। भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की परंपरा ही आज के वैश्विक संकट का एकमात्र समाधान है।”

अन्याय के खिलाफ एक वैश्विक पुकार: झारखंड मुस्लिम युवा मंच ने उन सभी पीड़ितों के प्रति संवेदना और एकजुटता जाहिर की जिन्होंने नफरत और हिंसा के कारण अपनों को खोया है। शाहिद अय्यूबी ने विशेष रूप से नाम लेते हुए कहा, “हम इंसाफ की मांग में हर पीड़ित के साथ हैं, चाहे वह बांग्लादेश का दीपू चंद्र दास हो, बिहार के अतहर और कादिर हों, झारखंड के तबरेज अंसारी हों, या फिलिस्तीन के वो बेगुनाह बच्चे जिनकी मुस्कान युद्ध की भेंट चढ़ गई।”

मंच का साझा संकल्प: विज्ञप्ति के अंत में उन्होंने एक ऐसे विश्व के निर्माण का आह्वान किया जहाँ:

सुरक्षा: हर मासूम को अमन की नींद नसीब हो।

समानता: धर्म या पहचान के आधार पर कोई निशाना न बने।

भाईचारा: पड़ोसी का धर्म सबसे बड़ा धर्म माना जाए।

शाहिद अय्यूबी ने अंत में जोर देकर कहा, “जुल्म और नाइंसाफी का कोई धर्म या राष्ट्र नहीं होता। यदि हम आज खामोश रहे, तो यह आने वाली पीढ़ियों के साथ विश्वासघात होगा। हम दुनिया भर के सताए गए हर इंसान की आवाज बनने का संकल्प लेते हैं।”

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