जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली में राष्ट्रीय गणित दिवस पर कार्यशाला संपन्न : गणित को ‘कठिन’ नहीं ‘खोज’ का विषय बनाने पर जोर


जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली के दयानंद सभागार में आज ‘राष्ट्रीय गणित दिवस’ के अवसर पर एक भव्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यशाला में विद्यालय के लगभग 70 शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ प्राचार्य श्री समरजीत जाना, उप प्राचार्य श्री बी. एन. झा एवं श्री संजय कुमार, विद्यालय प्रशिक्षण नोडल अधिकारी श्री इंद्रजीत कुमार तथा छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष श्री एल. एन. पटनायक द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

वक्ताओं ने रेखांकित किया कि महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का जीवन केवल अंकों का खेल नहीं, बल्कि अदम्य साहस और खोज की प्रेरणा है। चर्चा के दौरान यह बात प्रमुखता से उभरी कि भारत की प्राचीन गणितीय विरासत चाहे वह ‘शून्य की खोज हो या दशमलव प्रणाली’ आज के आधुनिक विज्ञान का आधार है।

शिक्षकों से आह्वान किया गया कि वे गणित को एक ‘ कठिन विषय’ के बजाय ‘ समस्या सुलझाने की कला’ के रूप में छात्रों के सामने पेश करें, ताकि उनमें रटने के बजाय तार्किक सोच विकसित हो सके।

कार्यशाला के दौरान प्रसिद्ध गणितज्ञ शकुंतला देवी के विचारों को साझा करते हुए बताया गया कि गणित के बिना जीवन की कल्पना असंभव है, क्योंकि हमारे आसपास की हर वस्तु संख्याओं और गणित से जुड़ी है।

रिसोर्स पर्सन ने पीपीटी, ऑडियो-वीडियो और रोचक गतिविधियों के माध्यम से श्रीनिवास रामानुजन के जीवन संघर्ष, भारत की समृद्ध गणितीय विरासत और दैनिक जीवन में गणित की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

*विद्यालय प्रशिक्षण नोडल अधिकारी श्री इंद्रजीत कुमार* ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि सुई, रसोई के प्रबंधन से लेकर संगीत की लय,  खेल के मैदान और हवाई जहाज तक गणित हर जगह मौजूद है। उन्होंने रामानुजन संख्या (1729), शून्य और दशमलव के आविष्कार सहित आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और भास्कराचार्य जैसे प्राचीन मनीषियों के योगदान पर विस्तार से चर्चा की।

*प्राचार्य श्री समरजीत जाना* ने अपने संबोधन में शिक्षकों से आह्वान किया कि वे छात्रों को यह समझाएँ कि गणित ‘कठिन’ नहीं बल्कि ‘खोज’ का विषय है। उन्होंने इसे समस्या सुलझाने की एक कला बताते हुए आधुनिक युग में GeoGebra सॉफ्टवेयर और AI टूल्स के माध्यम से शिक्षा देने पर जोर दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि शिक्षक ही समाज में सकारात्मक बदलाव के असली वाहक हैं इसलिए छात्रों के मन से मैथ्स फोबिया का भूत भगाना आवश्यक है।

इस गरिमामयी अवसर पर प्रभाग प्रभारी श्रीमती अनुपमा श्रीवास्तव, श्री शीलेश्वर झा ‘सुशील’, श्री दीपक कुमार सिन्हा और डॉ. मोती प्रसाद सहित विद्यालय परिवार के कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

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