
झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड* में निबंधित लगभग 33% वक्फ संपत्तियों का डेटा अभी तक भारत सरकार के UMEED पोर्टल (Universal Management of E-Development of Wakf) पर अपलोड नहीं हो पाया है, जिसके कारण राज्य की वक्फ संपत्तियों के भविष्य और प्रबंधन पर गंभीर चिंता के बादल छा गए हैं। डेटा अपलोड करने की अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है, और इस संबंध में झारखंड वक्फ बोर्ड द्वारा समय सीमा बढ़ाने हेतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, झारखंड सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
यह बताया गया है कि जिस प्रकार पंजाब और गुजरात वक्फ बोर्ड ने अपने राज्यों के वक्फ ट्रिब्यूनल में सफलतापूर्वक आवेदन दायर कर समय सीमा में बढ़ोतरी प्राप्त की है, उसी तर्ज पर झारखंड वक्फ बोर्ड को भी तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
एक प्रतिनिधि समूह ने माननीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री, श्री हफ़ीजुल हसन अंसारी से विनम्र अनुरोध किया है कि वे झारखंड वक्फ बोर्ड को निर्देश दें कि वह नए वक्फ कानून (UMEED) की धारा 3B के तहत तत्काल झारखंड वक्फ ट्रिब्यूनल में एक सामूहिक आवेदन (Application) दायर करे।
इस सामूहिक आवेदन के माध्यम से वक्फ बोर्ड के लिए कम से कम 06 (छह) महीने की अतिरिक्त समय सीमा बढ़ाने की मांग की जानी चाहिए। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि यह महत्वपूर्ण कार्य अलग-अलग मोतवल्लियों के भरोसे छोड़ा गया, तो उन्हें पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा, जिससे इतनी बड़ी संख्या में संपत्तियों के डेटा अपलोड का कार्य बाधित होगा और वे वंचित रह जाएंगे।
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री से अनुरोध किया गया है कि वे इस महत्वपूर्ण विषय पर तत्काल ध्यान दें और झारखंड वक्फ बोर्ड को जल्द से जल्द ट्रिब्यूनल में आवेदन दायर करने का निर्देश देने की कृपा करें, ताकि राज्य की शेष वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण बिना किसी बाधा के पूर्ण हो सके।
इस त्वरित कार्रवाई को वक्फ संपत्तियों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।
