
रांची: पारस एचइसी हॉस्पिटल रांची में अब अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) और एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (ईबीयूएस) की सुविधा शुरू कर दी गई है। इस नई तकनीक के आने से पेट, लीवर, पैनक्रियाज और फेफड़ों से जुड़ी जटिल बीमारियों के निदान और इलाज में बड़ी सहूलियत मिलेगी।
इस सुविधा का संचालन गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट बिग्रेडियर डॉ आलोक चंद्रा, डॉ अनिकेत कुमार और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ ओकांर झा के नेतृत्व में किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुभव और आधुनिक तकनीक के संयोजन से मरीजों को अब बेहतर, सटीक और सुरक्षित इलाज मिल सकेगा।
(EUS) द्वारा गंभीर बीमारियों के इलाज में होगी सुविधा
बिग्रेडियर डॉ आलोक चंद्रा ने कहा कि इस आधुनिक तकनीक के शुरू होने से टीबी, कैंसर, लीवर और पैनक्रियाज से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज में काफी सुधार आएगा। अब मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि रांची में ही विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। हाल ही में अस्पताल में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें मरीज की छाती में गांठ का कारण सिटी स्कैन से स्पष्ट नहीं हो पा रहा था। (EUS) तकनीक की मदद से सटीक जांच कर न केवल बीमारी की पहचान की गई, बल्कि सफल उपचार भी संभव हुआ।
डॉ अनिकेत कुमार ने कहा कि एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) एक उन्नत तकनीक है, जिसमें एंडोस्कोप के जरिए शरीर के अंदर जाकर पेट, आंत और भोजन नली के आसपास के अंगों—जैसे पैनक्रियाज और लीवर—की बेहद सूक्ष्म जांच की जाती है। पहले इन अंगों की जांच के लिए सिटी स्कैन या बाहरी अल्ट्रासाउंड पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब सीधे प्रभावित हिस्से से टिश्यू (बायोप्सी) लेकर बीमारी की पुष्टि की जा सकती है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर इसी प्रक्रिया के दौरान इलाज भी संभव है।
ईबीयूएस से फेफड़ों की बीमारी का सटीक निदान
डॉ ओंकार कुमार झा एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (ईबीयूएस) तकनीक श्वास नली के अंदर से अल्ट्रासाउंड की मदद से फेफड़ों और आसपास के लिम्फ नोड्स की जांच करने में सक्षम बनाती है। इस तकनीक से बिना किसी बड़ी सर्जरी के सुई के जरिए सैंपल लेना, मवाद (पस) निकालना आवश्यकतानुसार संभव हो गया है।
डॉ झा ने कहा कि इस सुविधा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब कई गंभीर स्थितियों में सर्जरी की आवश्यकता कम हो जाएगी।
पहले ऑपरेशन करना पड़ता था, लेकिन अब मीडियास्टिनल लिंफ़ नोड का सैंपललिग EBUS गाइडेड TBNA से हो सकता हैं और कैंसर, टीबी सरकावाडोसिर, लिंफोमा जैसे बीमारी का निदान आसानी से किया जा सकता हैं। यह लंग कैंसर स्टेजिंग के लिए स्टैंडर्ड ऑफ कोर माना जाता है।
पारस हॉस्पिटल के फैसेलिटी डायरेक्टर डॉ नीतेश कुमार ने कहा कि यह सुविधा झारखंड और आसपास के मरीजों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। अब मरीजों को उन्नत जांच और इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने बताया कि पारस अस्पताल का उद्देश्य है अत्याधुनिक तकनीक को निरंतर साझा करना एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों के माध्यम से मरीजों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना। यह सुविधा झारखंड में बहुत ही कम जगहों पर उपलब्ध है।
