
रांची: झारखंड गठन के बाद पहली बार राज्य की पंचायतों को इतनी बड़ी वित्तीय सहायता मिली है, जिससे ग्रामीण विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में 15वें वित्त आयोग के तहत राज्य को कुल 2254 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जिसे 4345 पंचायतों में वितरित किया गया है।
इस राशि के अनुसार, प्रत्येक पंचायत के हिस्से में औसतन 52 लाख रुपये से अधिक आए हैं, जो अब तक की सबसे बड़ी सहायता मानी जा रही है। लंबे समय से संसाधनों की कमी से जूझ रहे गांव अब विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।
यह पहली बार है जब राज्य वित्त आयोग के माध्यम से भी पंचायतों को अनुदान राशि दी गई है, जो स्थानीय विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
📊 वर्षवार राशि का विवरण:
2021–22: 624.50 करोड़ रुपये
2022–23: 1271 करोड़ रुपये
2023–24: 1300 करोड़ रुपये
2024–25: 653.50 करोड़ रुपये
2025–26: 2254 करोड़ रुपये (सर्वाधिक)
📍 प्रमंडलवार वितरण:
उत्तरी छोटा नागपुर: 767.15 करोड़ रुपये
संथाल परगना: 520.59 करोड़ रुपये
दक्षिणी छोटा नागपुर: 367.78 करोड़ रुपये
कोल्हान: 300.44 करोड़ रुपये
पलामू: 294.74 करोड़ रुपये
इस राशि का उपयोग गांवों में पेयजल, स्वच्छता, बुनियादी ढांचे और अन्य आवश्यक योजनाओं पर किया जाएगा। टाइड फंड से जहां जल एवं स्वच्छता योजनाओं को बढ़ावा मिलेगा, वहीं अनटाइड फंड से पंचायत अपनी जरूरत के अनुसार विकास कार्यों को प्राथमिकता दे सकेंगी।
राज्य की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि केंद्र सरकार के साथ लगातार संवाद और प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह राशि गांवों के विकास और ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को याद करते हुए कहा कि “भारत की आत्मा गांवों में बसती है” और गांवों के विकास से ही राज्य और देश का समग्र विकास संभव है।
अंत में उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि वे पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ योजनाओं का चयन करें और उन्हें जमीन पर उतारें, ताकि इस ऐतिहासिक सहायता का अधिकतम लाभ ग्रामीण जनता तक पहुंच सके।
