
TEDxKanke का प्रमुख 2025 कार्यक्रम 14 दिसंबर 2025 को कांके रोड स्थित होटल हॉलिडे होम, रांची में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। सुबह 9:30 बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में “एन एरा ऑफ एआई (An Era of AI)” विषय के अंतर्गत 14 दूरदर्शी वक्ता एक ही मंच पर एकत्रित हुए। यह आयोजन इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आधिकारिक प्री-समिट इवेंट रहा, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार के अंतर्गत इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट की प्री-समिट इवेंट्स टीम से स्वीकृति प्राप्त हुई। यह कार्यक्रम CyberPeace, Tata Steel, Hotel Holiday Home, DigiCrow Consulting और Virtue Wealth Counsel के सहयोग से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
इस कार्यक्रम ने हमारे समय के सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न को केंद्र में रखा—
हम यह कैसे सुनिश्चित करें कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और मानवीय बुद्धिमत्ता (Human Intelligence) मिलकर हमारी साझा मानवता की सेवा करें?
इस अवसर पर TEDxKanke के क्यूरेटर एवं लाइसेंसधारी राजीव गुप्ता ने कहा,
*”एआई केवल एक उपकरण नहीं है; यह एक दर्पण है, जो यह दर्शाता है कि हम कौन हैं—हमारा साहस और हमारे डर, हमारी उदारता और हमारी सीमाएँ।”*
यह आयोजन टाटा स्टील लिमिटेड और CyberPeace के सहयोग से किया गया, जिसमें होटल हॉलिडे होम हॉस्पिटैलिटी पार्टनर और DigiCrow डिजिटल पार्टनर रहे।
कार्यक्रम में भारतीय नवाचार, प्रशासन और नेतृत्व का एक असाधारण संगम देखने को मिला।
डॉ. अमर कुमार पांडे (IPS), पूर्व डीजीपी, कर्नाटक ने “Intuition vs Intelligence in the AI Era” विषय पर अपने विचार साझा करते हुए बताया कि मानवीय अंतर्ज्ञान और मशीनी बुद्धिमत्ता के बीच संतुलन बनाकर ही प्रभावी निर्णय प्रणाली विकसित की जा सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई का अंतिम उद्देश्य मानवीय निर्णय क्षमता को पूरक बनाना होना चाहिए, न कि उसका स्थान लेना।
डॉ. सुनील कुमार बर्नवाल (IAS) ने “From Fragmented Care to Intelligent Health” सत्र के माध्यम से भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को एआई-सक्षम इंटेलिजेंट सिस्टम में रूपांतरित करने की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसे मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की नींव बताते हुए 50 करोड़ से अधिक नागरिकों तक सटीक और समावेशी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
राखी प्रसाद, क्लैरिटीएक्स (ClarityX) की सह-संस्थापक, ने “Data, AI & the Human Edge” सत्र में कहा कि स्वयं की स्पष्टता के बिना डेटा का कोई वास्तविक मूल्य नहीं है। उन्होंने इस दौर को “ऑगमेंटेड इंटेलिजेंस” का युग बताते हुए कहा कि भविष्य उन्हीं नेताओं का है जो साहस और नैतिकता के साथ एआई का उपयोग करेंगे।
शौर्य गायकवाड़ ने “The Age of Courage Begins with AI” में यह विचार रखा कि एआई ने दुनिया को योग्यता के युग से साहस के युग में पहुंचा दिया है, जहां डिग्री से अधिक महत्व सीखने की गति, अनुकूलन क्षमता और जोखिम उठाने के साहस का है।
विशेषज्ञ सत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा हुई।
डॉ. देवाजी पाटिल ने “Skill First for Nutrition Impact” के तहत बच्चों में कुपोषण की चुनौती पर बात करते हुए ‘स्किल फर्स्ट’ मेंटरशिप मॉडल को समाधान के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एआई और मशीन लर्निंग के माध्यम से बच्चों के विकास की निगरानी कर लाखों शिशुओं के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार संभव है।
डॉ. अनूप नंदी (NIT राउरकेला) ने “Redefining Modern Healthcare with Responsible AI” सत्र में डॉक्टरों की कमी और निदान संबंधी त्रुटियों को कम करने के लिए जिम्मेदार एआई के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने ऑटिज़्म देखभाल के लिए CARAT रोबोट जैसे नवाचारों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवा का भविष्य मानव और एआई के सहयोग पर आधारित है।
दास गदाधर दास (संस्थापक, भक्तिवेदांत विद्याभवन गुरुकुल) ने “Can AI Supersede Human Intelligence?” सत्र में प्रौद्योगिकी की दार्शनिक सीमाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एआई तार्किक कार्यों की नकल कर सकता है, लेकिन मानवीय चेतना, भावनाओं और आध्यात्मिक गहराई का स्थान नहीं ले सकता।
विकास हिरानी ने “AI Can Destroy the Earth — and Also Save It” सत्र में एआई के दोहरे प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जहां एआई का पर्यावरण पर ऊर्जा और जल खपत के रूप में नकारात्मक प्रभाव है, वहीं स्मार्ट ग्रिड और संसाधन अनुकूलन के जरिए पृथ्वी को बचाने की क्षमता भी इसमें मौजूद है।
माइक्रोसॉफ्ट एआई का प्रतिनिधित्व करते हुए हरिहरन रघुनाथन ने “The Hidden Skill That Will Matter Most in the AI Era” में कहा कि इस युग में इंसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कौशल “विचारों की स्पष्टता” है। उन्होंने ‘पॉज़ ट्रायंगल’ फ्रेमवर्क के माध्यम से समझाया कि एआई मानवीय इरादों का प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि उनका गुणक बनकर कार्य करता है।
वहीं, कृत्रिम पैर के साथ दुनिया के सबसे युवा सोलो स्काईडाइवर श्याम कुमार एस.एस. ने “Becoming Cybroid, Becoming Myself” सत्र में अपनी प्रेरक जीवन यात्रा साझा की। उन्होंने ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस और डिजिटल ट्विन जैसी तकनीकों के माध्यम से न्यूरो-बायोनिक भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित किया, जो शारीरिक सीमाओं को पार कर मानवीय क्षमताओं को नया आयाम दे सकती हैं।
कार्यक्रम का संचालन आईआईएम रांची के एमबीए छात्रों प्रीतिका पॉल और हरेकृष्ण ने किया। कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण आईआईएम रांची की एकत्व (Ekātva) टीम द्वारा प्रस्तुत नाट्य प्रस्तुति “EKATVA – Becoming One” रही, जिसने एआई के विकास और मानव-मशीन संबंधों को भावनात्मक, नैतिक और दार्शनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल तकनीक का उत्सव मनाना नहीं था, बल्कि जिम्मेदार एआई के प्रति एक सामूहिक आह्वान भी था। प्रतिभागियों ने एआई युग में प्रासंगिक बने रहने, डेटा और भावनात्मक बुद्धिमत्ता के संतुलन तथा एआई को प्रतिस्थापन नहीं बल्कि एक सहयोगी के रूप में अपनाने से जुड़े व्यावहारिक दृष्टिकोण प्राप्त किए।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए *TEDxKanke* और *DigiCrow Consulting* की टीम ने कड़ी मेहनत की।


