
राँची: झारखंड मुस्लिम युवा मंच के केंद्रीय अध्यक्ष मोहम्मद शाहिद अय्यूबी ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं और दलितों पर हो रहे निरंतर अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारत सरकार से कड़े कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाने की मांग की है।
शाहिद अय्यूबी ने एक कड़ा संदेश जारी करते हुए कहा कि मानवीय क्रूरता और व्यापारिक सहयोग एक साथ नहीं चल सकते।
उन्होंने केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों से अपील की है कि वे बांग्लादेश के साथ होने वाले व्यापार को ‘रणनीतिक हथियार’ के रूप में इस्तेमाल करें।
संसाधनों की आपूर्ति पर रोक की मांग भारत वर्तमान में अडानी पावर, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा ग्रिड के माध्यम से बांग्लादेश को लगभग 2,656 मेगावाट बिजली दे रहा है। साथ ही झारखंड और मेघालय से भारी मात्रा में कोयले की आपूर्ति की जा रही है।
अय्यूबी ने मांग की है कि यदि बांग्लादेश सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में विफल रहती है, तो इस आपूर्ति को तत्काल प्रभाव से काटने की चेतावनी दी जाए।
आर्थिक शक्ति का उपयोग: मंच का मानना है कि केवल जुबानी विरोध काफी नहीं है। भारत को अपनी आर्थिक शक्ति दिखाते हुए स्पष्ट कर देना चाहिए कि “बिजली और व्यापार” की निरंतरता वहां “हिंदुओं की जान” की सुरक्षा पर निर्भर करेगी।
सीमावर्ती व्यापार पर कड़ा रुख: नेपाल से भारतीय ग्रिड के जरिए जाने वाली बिजली और सभी सीमावर्ती व्यापार को इस मुद्दे से जोड़ने की मांग की गई है।
“जब पड़ोस के घर में मानवता लहूलुहान हो, तो हम संसाधनों की आपूर्ति जारी रखकर मूकदर्शक नहीं बने रह सकते। भारत सरकार को दो टूक संदेश देना चाहिए कि अल्पसंख्यकों पर जुल्म बंद हो, अन्यथा भारत अपने संसाधनों की सप्लाई काटने के लिए पूरी तरह तैयार है
दूसरी ओर बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत सरकार द्वारा।
डेढ़ वर्षो से सुरक्षित आवास
Z सिक्योरिटी ,चिकित्सा सहायता,भोजन आदि का व्यवस्था भारत सरकार द्वारा की जा रही है।
मोहम्मद शाहिद अय्यूबी केंद्रीय अध्यक्ष, झारखंड मुस्लिम युवा मंच
भारत सरकार से मांग करता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी बांग्लादेश पर दबाव बनाया जाए ताकि वहां रहने वाले हर अल्पसंख्यक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

