तीन वर्षों से लंबित छात्रवृत्ति के विरोध में NSUI का ऐतिहासिक छात्र आक्रोश मार्च, राजभवन का घेराव

राष्ट्रीय नेतृत्व ने सराहा संघर्ष, न्याय की लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने का संकल्प

रांची | 10 जनवरी 2026
झारखंड के लगभग 4 लाख 50 हजार वंचित छात्र-छात्राओं की पिछले तीन वर्षों से लंबित छात्रवृत्ति की मांग को लेकर 10 जनवरी को झारखंड एनएसयूआई के बैनर तले हजारों विद्यार्थियों ने छात्र आक्रोश मार्च निकालते हुए राजभवन का घेराव किया। यह आंदोलन केंद्र सरकार की उदासीनता और छात्र विरोधी रवैये के खिलाफ एक सशक्त और ऐतिहासिक प्रतिरोध के रूप में उभरा।
           झारखंड एनएसयूआई ने असहनीय हालात में विद्यार्थियों के साथ खड़े होकर न्याय की इस लड़ाई को पूरी मुखरता और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ाया। इस संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है।
          दिल्ली से झारखंड कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के स्थायी सदस्य एवं झारखंड कांग्रेस कमेटी के प्रभारी श्री के. राजू जी ने झारखंड एनएसयूआई के इस आंदोलन की सराहना करते हुए लड़ाई की सराहना एवं लड़ाई को आगे जारी रखने के लिए शुभकामना चिट्ठी भेजी, जो प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष आदरणीय श्री बंधु तिर्की जी के कर-कमलों द्वारा प्राप्त हुई।
राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा राज्य स्तरीय संघर्ष पर संज्ञान लेना और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना, झारखंड एनएसयूआई के लिए ऊर्जा और आत्मविश्वास का बड़ा स्रोत है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल विरोध तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अंतिम और निर्णायक परिणाम तक ले जाई जाएगी, ताकि झारखंड के लाखों वंचित विद्यार्थियों को उनका संवैधानिक अधिकार मिल सके।
       एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष श्री विनय उरांव जी ने इस पूरे आंदोलन में सहयोग देने वाले प्रदेश के तमाम अभिभावकों, छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया। विशेष रूप से कार्यकारी अध्यक्ष आदरणीय श्री बंधु तिर्की जी को धन्यवाद दिया, जिन्होंने इस आंदोलन में अभिभावक से भी बढ़कर भूमिका निभाते हुए शुरुआत से लेकर अंत तक हर स्तर पर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया, जिससे आंदोलन सफल हो सका।
        झारखंड एनएसयूआई ने राज्यपाल महोदय से अपेक्षा जताई है कि वे केंद्र सरकार के समक्ष विद्यार्थियों की समस्या को मजबूती से रखते हुए त्वरित समाधान सुनिश्चित करेंगे। संगठन ने चेतावनी भी दी कि यदि इस मुद्दे को नजरअंदाज किया गया या अनावश्यक देरी की गई, तो एनएसयूआई इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाकर और अधिक व्यापक रूप से संघर्ष करेगी।
            इस पर एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि “केंद्र सरकार यदि छात्रवृत्ति को भीख समझती है तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है। छात्रवृत्ति कोई एहसान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का संवैधानिक अधिकार है, जिसे कोई भी सरकार चाहकर भी दबा नहीं सकती।” झारखंड एनएसयूआई ने संकल्प लिया है कि हर हाल में झारखंड के वंचित विद्यार्थियों को उनका हक दिलाकर रहेगा, चाहे इसके लिए संघर्ष का दायरा कितना ही व्यापक क्यों न करना पड़े।
इस मौके पर झारखंड एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष सह संगठन प्रभारी श्री संकेत सुमन जी की भी गरिमाई उपस्थिति रही।

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