
रांची।
झारखंड के ओबीसी विद्यार्थियों की लंबित छात्रवृत्ति को लेकर केंद्र सरकार एवं भारतीय जनता पार्टी की कथनी-करनी में बड़ा विरोधाभास सामने आया है। अब तक राज्य सरकार पर यह आरोप लगाया जाता रहा कि केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई राशि को अन्य मदों में खर्च कर दिया गया और उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। लेकिन बीते मंगलवार को भाजपा के घटक दल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के राज्यसभा सांसद झारखंड अपने संगठन कार्यक्रम को लेकर आगमन हुआ था उसे मौके पर उनके बयान ने केंद्र सरकार की असली मंशा को उजागर कर दिया है।
राज्यसभा सांसद ने केंद्र में विभागीय मंत्री होने के नाते एक हफ्ता में झारखंड के विद्यार्थियों की लंबित छात्रवृत्ति दे दिया जाएगा। यह कहते हुए सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि “केंद्र सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है, लेकिन झारखंड की अबुआ सरकार को आदिवासियों और राज्य के विकास के नाम पर दबाव बनाकर भारतीय जनता पार्टी को किसी भी तरह सत्ता में लाना चाहती है। सत्ता में आने के बाद ही झारखंड के 4.50 लाख वंचित विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति राशि दी जाएगी।”
इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए एनएसयूआई झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष श्री विनय उरांव ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ खुला राजनीतिक खेल बताया। उन्होंने कहा—
“न झारखंड का विद्यार्थी कमजोर है और न ही अबुआ सरकार। केंद्र सरकार डराने-धमकाने की राजनीति बंद करे। पिछले तीन वर्षों से वंचित झारखंड के 4.50 लाख विद्यार्थियों की लगभग 750 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि अविलंब जारी की जाए।” विनय उरांव ने आगे कहा कि झारखंड का छात्र वर्ग अब केंद्र सरकार की झूठी कहानियों को समझ चुका है और अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने को पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने भाजपा की दोहरी राजनीति पर भी तीखा प्रहार करते हुए कहा—
“एक तरफ भाजपा खुद को ओबीसी हितैषी दिखाने के लिए झारखंड में ओबीसी चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर खुश करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के 4.50 लाख ओबीसी विद्यार्थियों के हाथ में छात्रवृत्ति के लिए कटोरी थमा दी गई है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।”
एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्र संगठन इस दोहरी और जनविरोधी राजनीति को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा और इसे जन-जन के बीच बेनकाब करके ही दम लेगा।
