
रांची। झारखंड सरकार का ग्रामीण विकास विभाग प्रशासनिक व्यवस्था को तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में एक नई पहल कर रहा है। विभाग ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल के साथ झारखंड देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जहां किसी सरकारी विभाग ने कर्मचारियों के लिए AI क्षमता निर्माण को संगठित रूप दिया है।
यह पहल ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य और पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पहल पर शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाना है।
इस दिशा में 17 अक्टूबर 2025 को विभाग ने ग्रामीण AI सपोर्ट सेल की स्थापना की। इसके माध्यम से प्रशासनिक कार्यों में डिजिटल टूल्स और डेटा आधारित प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल को आगे बढ़ाने में विनोद कुमार पांडेय (The/Nudge Institute के इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव फेलो) और विभाग के अवर सचिव चंद्र भूषण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
जनवरी से फरवरी 2026 के बीच विभाग द्वारा छह प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें 40 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। इन प्रतिभागियों में कंप्यूटर ऑपरेटर, डेटा एंट्री कर्मचारी, अनुभाग अधिकारी, सहायक अधिकारी और अवर सचिव स्तर तक के अधिकारी शामिल रहे।
प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को Claude AI, Microsoft Copilot, Power BI, Perplexity AI और Gamma जैसे आधुनिक AI टूल्स के उपयोग की जानकारी दी गई। इनके माध्यम से सरकारी नोटशीट और पत्र तैयार करना, लंबी फाइलों का सारांश निकालना, डेटा विश्लेषण करना और योजनाओं की प्रगति पर डैशबोर्ड बनाना जैसे कार्य अधिक तेजी से किए जा सकेंगे।
विभाग की योजना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) सहित अन्य योजनाओं की निगरानी के लिए लाइव डैशबोर्ड विकसित किए जाएं और भविष्य में इंटीग्रेटेड रूरल डेटा हब बनाया जाए। इसके साथ ही ग्रामीण नागरिकों को योजनाओं की जानकारी देने के लिए AI आधारित चैटबॉट विकसित करने की भी योजना है।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों का तकनीकी रूप से सक्षम होना जरूरी है। उनके अनुसार AI प्रशिक्षण की यह पहल झारखंड को तकनीक आधारित सुशासन के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल होती है, तो यह मॉडल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।
