
जामताड़ा। मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी आज एक अत्यंत गरीब एवं शोकाकुल परिवार के बीच पहुंचे। हाल ही में निमिता मरांडी के 26 वर्षीय पति वीरनाथ सोरेन का आकस्मिक निधन हो गया, जिससे पूरा परिवार गहरे संकट में आ गया। अपने पीछे वे अपनी पत्नी, दो छोटे बच्चों तथा वृद्ध माता-पिता को छोड़ गए।
परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय होने की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य मंत्री स्वयं उनके घर पहुंचे, शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।

इस दौरान डॉ. इरफान अंसारी ने दोनों मासूम बच्चों की जिम्मेदारी उठाने की घोषणा करते हुए कहा, “आज से ये बच्चे मेरे भी बच्चे हैं। इनके पालन-पोषण, शिक्षा और बेहतर भविष्य की चिंता अब मेरी है। मैं इन्हें पढ़ाऊंगा-लिखाऊंगा और समाज में सम्मान के साथ आगे बढ़ाऊंगा।”
मंत्री ने परिवार की स्थिति को देखते हुए वीरनाथ सोरेन की पत्नी को आउटसोर्सिंग के माध्यम से रोजगार दिलाने का भरोसा भी दिया। उन्होंने कहा, “मैं आपको अपने पैरों पर खड़ा करने का पूरा प्रयास करूंगा, ताकि आप अपने बच्चों और वृद्ध माता-पिता का सम्मानपूर्वक पालन-पोषण कर सकें। सरकार और मैं हर कदम पर आपके साथ हैं।”
मंत्री की यह घोषणा सुनते ही परिवार की आंखें नम हो गईं। निमिता मरांडी भावुक होकर डॉ. इरफान अंसारी से लिपट गईं और कहा कि वे उम्मीद लेकर उनके पास आई थीं, लेकिन मंत्री ने उम्मीद से कहीं अधिक विश्वास दिया है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग और आत्मीयता को वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगी।
मंत्री ने परिवार के सबसे छोटे 9 माह के मासूम पुत्र सोनू सोरेन को अपनी गोद में उठाकर स्नेह दिया और उसके उज्ज्वल भविष्य की जिम्मेदारी लेने का संकल्प दोहराया। यह भावुक दृश्य देखकर उपस्थित ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं।
ग्रामीणों ने कहा कि डॉ. इरफान अंसारी पहले भी जरूरतमंद परिवारों की मदद करते रहे हैं और आज एक बार फिर उन्होंने साबित कर दिया कि वे केवल जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि गरीबों और असहायों के सच्चे संरक्षक हैं। ग्रामीणों ने मंत्री के इस मानवीय कदम की मुक्त कंठ से सराहना की।> नोट: मैंने आपके दिए विवरण के अनुसार लिखा है। यदि “9 माह के बच्चे का नाम सोनू सोरेन” है तो यह ठीक है। यदि सोनू सोरेन किसी दूसरे बच्चे का नाम है, तो नाम स्पष्ट कर दें, मैं उसे सही कर दूँ।
