रांची के लापता मासूम भाई–बहन मामले में NCPCR ने लिया स्वतः संज्ञान, डीजीपी से मांगी रिपोर्ट

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का सख्त रुख

Ranchi | News Desk
रांची के धुर्वा इलाके से रहस्यमय तरीके से लापता हुए दो मासूम भाई–बहन अंश कुमार (5 वर्ष) और अंशिका कुमारी (4 वर्ष) के मामले में अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता दिखाई जा रही है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा को पत्र भेजकर अब तक की गई कार्रवाई और जांच की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
मीडिया रिपोर्ट के आधार पर जारी हुआ नोटिस
NCPCR ने यह नोटिस मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर जारी किया है। आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2005 की धारा 13 के तहत बच्चों के अधिकारों से जुड़े मामलों की निगरानी करना उसका संवैधानिक दायित्व है।
आयोग ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि POCSO एक्ट, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और शिक्षा का अधिकार अधिनियम जैसे कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य प्रशासन की है।
डीजीपी से क्या-क्या जानकारी मांगी गई
NCPCR ने झारखंड पुलिस और प्रशासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी है:
बच्चों की तलाश में अब तक की गई पुलिस कार्रवाई
गठित एसआईटी की जांच प्रगति
छापेमारी और तकनीकी जांच (CCTV, मोबाइल लोकेशन आदि)
विभिन्न राज्यों के साथ समन्वय की स्थिति
अब तक मिले सुराग और भविष्य की रणनीति
यह पत्र 13 जनवरी 2026 को जारी किया गया है।
क्या है पूरा मामला
घटना 2 जनवरी 2026 की है। रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र अंतर्गत मौसीबाड़ी से अंश कुमार और उसकी बहन अंशिका कुमारी बिस्कुट खरीदने के लिए घर से निकले थे, लेकिन इसके बाद दोनों बच्चे रहस्यमय तरीके से लापता हो गए।
अब 12 दिन बीत जाने के बावजूद बच्चों का कोई ठोस सुराग पुलिस के हाथ नहीं लग सका है।
इनाम बढ़ा, कई राज्यों में तलाश
मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस ने बच्चों की सूचना देने पर घोषित इनाम को बढ़ाकर कुल 4 लाख रुपये कर दिया है।
अब प्रति बच्चे 2-2 लाख रुपये का इनाम रखा गया है।
रांची पुलिस की एसआईटी की कई टीमें झारखंड के अलावा:
बिहार
उत्तर प्रदेश
ओडिशा
पश्चिम बंगाल
दिल्ली
राजस्थान
महाराष्ट्र
जैसे राज्यों में जांच कर रही हैं। वहीं, झारखंड CID की टीम भी पूरे मामले में रांची पुलिस को सहयोग दे रही है।
NCPCR के हस्तक्षेप से बढ़ा प्रशासनिक दबाव
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के हस्तक्षेप के बाद मामले में प्रशासनिक दबाव स्पष्ट रूप से बढ़ गया है। अब उम्मीद की जा रही है कि:
बच्चों की तलाश में तेजी आएगी
जांच प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी
जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी
परिजनों और आम लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही दोनों मासूम सुरक्षित मिलेंगे।

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