
सरला बिरला पब्लिक स्कूल, रांची में भारत के विविध कृषि पर्वों की उल्लासपूर्ण भावना के साथ-साथ डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में एक सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली विशेष सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सांस्कृतिक उमंग और संवैधानिक मूल्यों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला, जो विद्यालय की समग्र एवं मूल्य-आधारित शिक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ एक भावपूर्ण प्रस्तुति से हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने मधुर समूहगान एवं ऊर्जावान समूह नृत्य प्रस्तुत कर देशभर में मनाए जाने वाले कृषि पर्वों की जीवंत झलक प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों के विचारों और विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का क्रमिक संयोजन पूरे आयोजन को लयात्मक, आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक बनाता रहा।

कृषि पर्वों एवं अंबेडकर जयंती की थीम पर आधारित इस विशेष सभा में भारतीय संविधान को समर्पित एक मार्मिक प्रस्तुति दी गई, जिसमें न्याय, समानता और स्वतंत्रता जैसे मूल आदर्शों को प्रभावशाली ढंग से उभारा गया। डॉ. भीमराव अंबेडकर पर आधारित प्रश्नोत्तरी ने कार्यक्रम में सहभागिता का समावेश किया, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों के ज्ञान एवं जागरूकता का आकलन किया गया। साथ ही उनके जीवन से जुड़ी एक प्रेरणादायक घटना ने विद्यार्थियों को संघर्ष, दृढ़ संकल्प तथा सामाजिक सुधार के प्रति प्रेरित किया।
भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करते हुए तथा “एकता में विविधता” के महत्व को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों ने पोइला बैसाख, बैसाखी एवं बिहू जैसे पारंपरिक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं। इस विशेष सभा का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि पर्वों की सांस्कृतिक समृद्धि के प्रति संवेदनशील बनाना तथा डॉ. अंबेडकर के विचारों एवं संविधान के मूल्यों की गहन समझ विकसित करना था। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता, बढ़ी हुई जागरूकता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना इस उद्देश्य की सार्थकता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

विद्यालय की प्राचार्या, श्रीमती मनीषा शर्मा ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन सांस्कृतिक उत्सवों और नागरिक चेतना के समन्वय के लिए एक सशक्त एवं सार्थक मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रेरणादायी विरासत तथा कृषि पर्वों की समृद्ध परंपराओं से विद्यार्थियों को परिचित कराकर विद्यालय ऐसे जागरूक, संवेदनशील एवं उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण कर रहा है, जो अपनी सांस्कृतिक धरोहर और संवैधानिक आदर्शों का सम्मान करते हुए उन्हें जीवन में अपनाते हैं।
