
“देश नहीं संभल रहा तो जनता पर पाबंदी क्यों?” — पीएम मोदी की अपील पर फुरकान अंसारी का कड़ा बयान
“कच्चा तेल सस्ता, फिर भी पेट्रोल 100 पार — आखिर जनता को कौन लूट रहा है?”
“सोना मत खरीदो, घूमना बंद करो… अब क्या जनता सांस लेना भी मोदी सरकार से पूछे?” — फुरकान अंसारी
“महंगाई से टूटी जनता, अपीलों में उलझी मोदी सरकार — भाजपा के पतन की शुरुआत!”
“अगर झारखंड में हेमंत सरकार नहीं होती तो हालात भयावह होते” — फुरकान अंसारी ने गिनाए ₹2500 सहायता और मुफ्त बिजली के फायदे
देश के प्रधानमंत्री द्वारा नागरिकों से ईंधन बचाने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने, कार-पूलिंग करने, ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने, सोना नहीं खरीदने और विदेश यात्रा से बचने की अपील पर पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “देश की आर्थिक विफलता का सार्वजनिक स्वीकार” बताया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की यह अपील किसी दूरदर्शी नेतृत्व का नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की नाकामी और कमजोर आर्थिक प्रबंधन का प्रमाण है। जब सरकारें सफल होती हैं तो जनता को राहत देती हैं, लेकिन जब सरकारें असफल होती हैं तो जनता से त्याग मांगती हैं।
पूर्व सांसद ने कहा कि आज देश का मध्यम वर्ग, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी और युवा सबसे ज्यादा परेशान हैं। महंगाई लगातार बढ़ रही है, रोजगार घट रहे हैं, छोटे उद्योग बंद हो रहे हैं और ऊपर से सरकार जनता को ही जिम्मेदार नागरिक बनने का पाठ पढ़ा रही है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा “जब चुनाव के दौरान हजारों करोड़ रुपये खर्च कर चार्टर विमान उड़ाए जा सकते हैं, बड़े-बड़े रोड शो हो सकते हैं, तब देश पर कोई संकट नहीं दिखता। लेकिन चुनाव खत्म होते ही आम जनता को पेट्रोल बचाने, सोना न खरीदने और घूमना बंद करने की सलाह दी जाती है। आखिर सारी पाबंदियां सिर्फ गरीब और मिडिल क्लास के लिए ही क्यों?”
पूर्व सांसद ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद जनता को राहत मिलती थी, जबकि आज कच्चे तेल की कीमत कम होने और रूस से रियायती तेल मिलने के बाद भी जनता महंगा पेट्रोल खरीदने को मजबूर है।
उन्होंने कहा कि सरकार टैक्स के नाम पर जनता की जेब काट रही है और राष्ट्रवाद का नारा देकर लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटकाया जा रहा है। आज देश में आम आदमी की सबसे बड़ी समस्या महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असुरक्षा है।
फुरकान अंसारी ने कहा कि सोना भारतीय परिवारों के लिए सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि कठिन समय की आर्थिक सुरक्षा है। गरीब परिवार अपनी बेटियों की शादी, बीमारी और संकट के समय के लिए थोड़ा-थोड़ा सोना जोड़ते हैं। ऐसे में “सोना मत खरीदिए” जैसी अपील जमीन से कटे हुए नेतृत्व की मानसिकता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा “देश की जनता अब समझ चुकी है कि बड़ी-बड़ी बातें और विज्ञापन से पेट नहीं भरता। जनता महंगाई से त्रस्त है, युवा बेरोजगार हैं, किसान परेशान हैं और व्यापारी टूट चुके हैं। यही हालात भाजपा सरकार के पतन का रास्ता तैयार कर रहे हैं।”
पूर्व सांसद ने झारखंड सरकार की योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीबों और महिलाओं को राहत देने का काम कर रही है। महिलाओं को ₹2500 प्रतिमाह सहायता और 200 यूनिट मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से लोगों को वास्तविक सहारा मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर झारखंड में संवेदनशील सरकार नहीं होती तो यहां भी हालात और भयावह हो सकते थे।
अंत में उन्होंने कहा कि देश को भाषण और अपील नहीं, बल्कि मजबूत आर्थिक नीति, रोजगार, महंगाई पर नियंत्रण और जनता को राहत देने वाली सरकार की जरूरत है। जनता अब सवाल पूछ रही है और आने वाला समय इसका जवाब भी देगा।
