जाली दस्तावेज़ मामले में हुई कार्रवाई को राजनीतिक रंग देना बंद करे भाजपा : ऋषीकेश सिंह

रांची, दिनांक 15.07.2026

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव सह प्रदेश प्रवक्ता ऋषीकेश सिंह ने भाजपा युवा मोर्चा के नेता श्रीनिवास कुमार की गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कानून के तहत हुई कार्रवाई को राजनीतिक रंग देकर भाजपा जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।

ऋषीकेश सिंह ने कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उनकी पार्टी न्यायालय में कथित रूप से जाली दस्तावेज प्रस्तुत करने और सरकारी अधिकारी के हस्ताक्षर का दुरुपयोग करने जैसे गंभीर आरोपों का भी बचाव कर रही है? किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी उसके राजनीतिक विचारों के कारण नहीं, बल्कि विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत दर्ज प्राथमिकी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर हुई है।

ऋषीकेश सिंह ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार न्यायालय में प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ को संबंधित सरकारी विभाग ने फर्जी बताया। इसके बाद सरकारी अधिकारी के हस्ताक्षर और सरकारी अभिलेखों के कथित दुरुपयोग के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसी मामले में पुलिस ने कानून के अनुसार कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की। इसलिए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है।

ऋषीकेश सिंह ने कहा कि यदि भाजपा को लगता है कि प्रस्तुत दस्तावेज़ वास्तविक था, तो वह इसका प्रमाण न्यायालय में प्रस्तुत करे। प्रेस बयान देकर जनता को भ्रमित करने और जांच एजेंसियों पर दबाव बनाने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुकूल नहीं है।

प्रदेश प्रवक्ता ऋषीकेश सिंह ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना, उनका उपयोग करना तथा न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास गंभीर दंडनीय अपराध हैं। कानून सबके लिए समान है और किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।

ऋषीकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है कि यदि कोई व्यक्ति निर्दोष है तो उसे न्यायालय से न्याय अवश्य मिलेगा, लेकिन यदि किसी ने न्यायालय में कथित रूप से जाली दस्तावेज प्रस्तुत कर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होना स्वाभाविक और आवश्यक है।

ऋषीकेश सिंह ने भाजपा से आग्रह किया कि वह तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करे और कानून को अपना कार्य निष्पक्ष रूप से करने दे। झारखंड में कानून संविधान के अनुसार चलेगा, न कि किसी राजनीतिक दल के दबाव या बयानबाज़ी के आधार पर।

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