
राँची:
डॉ० श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में विभिन्न रोजगारपरक और भाषाई पाठ्यक्रमों की सीटों में प्रस्तावित कटौती के खिलाफ आदिवासी छात्र संघ (DSPMU) के अध्यक्ष विवेक तिर्की ने मोर्चा खोल दिया है। आज विवेक तिर्की के नेतृत्व में सचिव अमित टोप्पो व छात्र प्रतिनिधिमंडल ने माननीय कुलपति महोदय से मुलाकात की और छात्रों की गंभीर समस्याओं को लेकर एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा।
अध्यक्ष विवेक तिर्की ने कुलपति महोदय का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कुड़ुख, संथाली, मुंडारी, हो, खड़िया, खोरठा, कुरमाली, नागपुरी, पंचपरगनिया जैसे जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभागों के साथ-साथ बीबीए, एमबीए, कंप्यूटर विज्ञान और वाणिज्य संकाय की सीटों में कटौती का जो प्रस्ताव लाया गया है, वह पूरी तरह से छात्र विरोधी है। उन्होंने इस प्रस्तावित कटौती को तुरंत निरस्त कर वर्तमान सीटों को यथावत बनाए रखने की पुरजोर वकालत की।
ग्रामीण और वंचित वर्ग के हितों की रक्षा हमारी प्राथमिकता: विवेक
मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए विवेक तिर्की ने कहा:
“इन सभी पाठ्यक्रमों में हर साल बहुत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ आवेदन करते हैं। यदि सीटों में कटौती की जाती है, तो इसका सबसे सीधा और प्रतिकूल असर ग्रामीण, आदिवासी, आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर व वंचित वर्ग के विद्यार्थियों पर पड़ेगा। सीटों की कमी से कई होनहार छात्र उच्च शिक्षा से महरूम रह जाएंगे, जिसे आदिवासी छात्र संघ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।”
विवेक तिर्की ने आगे कहा कि आज के दौर में बीबीए, एमबीए, कंप्यूटर विज्ञान और वाणिज्य जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में सीटें बढ़ाने के बजाय उन्हें कम करना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। इसके साथ ही उन्होंने यूजी (स्नातक) और पीजी (स्नातोत्तर) की नामांकन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और मेरिट आधारित बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
विवेक तिर्की के नेतृत्व में सौंपी गईं मुख्य मांगें:
1. जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय: इसके तहत आने वाले सभी 9 स्वतंत्र विभागों में छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सीटें कम करने के बजाय और बढ़ाई जाएं।
2. सीट कटौती पर रोक: बीबीए, एमबीए, कंप्यूटर विज्ञान और वाणिज्य पाठ्यक्रमों की वर्तमान सीट संख्या को यथावत रखा जाए, कोई कटौती न हो।
3. पारदर्शी नामांकन: स्नातक और स्नातकोत्तर की दाखिला प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, मेरिट आधारित और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।
4. सार्वजनिक सूचनाएँ: सभी मेरिट लिस्ट, कट-ऑफ, खाली सीटों का विवरण और स्पॉट एडमिशन की जानकारी समय-समय पर विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए।
5. जवाबदेही तय हो: नामांकन प्रक्रिया में किसी भी तरह की धांधली, पक्षपात या मनमानी को रोकने के लिए एक प्रभावी निगरानी प्रणाली बने।
6. शिकायत निवारण: छात्र-छात्राओं की समस्याओं और शिकायतों के तुरंत समाधान के लिए एक मजबूत ‘शिकायत निवारण तंत्र’ (Grievance Redressal Cell) स्थापित हो।
विवेक तिर्की ने अंत में उम्मीद जताई कि माननीय कुलपति महोदय छात्रहित और विश्वविद्यालय की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इन मांगों पर त्वरित और न्यायपूर्ण निर्णय लेंगे, ताकि किसी भी योग्य छात्र को शिक्षा के अधिकार से वंचित न होना पड़े।
