
रांची। दिनांक 04 सितम्बर 2026
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश सचिव सह प्रदेश प्रवक्ता ऋषीकेश सिंह ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा को छात्रों के भविष्य की इतनी ही चिंता है तो पहले केंद्र में अपनी सरकार का हिसाब देश के युवाओं को दे। भाजपा पहले अपने गिरेबान में झांके, फिर झारखंड को नसीहत दे।
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि 2014 के बाद देश में पेपर लीक की 150 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। NEET, UGC-NET सहित कई राष्ट्रीय परीक्षाओं में लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ। केंद्र सरकार को परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालते हुए वर्षों हो गए, लेकिन भाजपा आज झारखंड में छात्रों के मुद्दे पर राजनीति करने का नैतिक अधिकार तभी रखती है, जब वह पहले देशभर में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं का हिसाब दे।
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि पेपर लीक के मामलों की जांच के लिए CBI सहित केंद्रीय एजेंसियां कई मामलों को देख रही हैं, लेकिन जांच और न्याय की रफ्तार पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। भाजपा को बताना चाहिए कि केंद्र में उसकी सरकार रहते पेपर लीक के खिलाफ कठोर कानून और दावे करने के बावजूद छात्रों को बार-बार परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा क्यों खोना पड़ा? भाजपा की नाकामी देश ने देखी है, लेकिन भाजपा को दिखाई नहीं देती।
ऋषीकेश सिंह ने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा को शायद ‘मोदियाबिंद’ हो गया है, उसे सिर्फ दूसरों की कमियां दिखाई देती हैं, अपनी सरकार की नाकामियां नहीं। आंखों का इलाज कराने से पहले भाजपा को राजनीतिक आत्ममंथन की जरूरत है।”
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षा विवादों पर कार्रवाई करते हुए 44 परीक्षाएं रद्द कीं, 17 मामलों में CID जांच और छह परीक्षाओं को स्थगित करने जैसे कदम उठाए हैं। ऐसे में भाजपा का हर मुद्दे को राजनीतिक आंदोलन में बदलना छात्रों के हित में नहीं है।
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि छात्रों पर यदि कोई मुकदमा गलत तरीके से दर्ज हुआ है तो सरकार को उसकी समीक्षा करेगी और दोषी नहीं होने वाले छात्रों को राहत मिलेगी, लेकिन हर कानूनी कार्रवाई को “फर्जी मुकदमा” बताकर राजनीतिक लाभ लेना भी उचित नहीं है। भाजपा को छात्रों की चिंता है तो वह आंदोलन की तारीख घोषित करने के साथ-साथ केंद्र सरकार की भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक मामलों पर भी श्वेतपत्र जारी करने की मांग करे।
ऋषीकेश सिंह ने कहा की भाजपा को छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीतिक जमीन तलाशने के बजाय अपने शासन का हिसाब देना चाहिए। “पहले दिल्ली का हिसाब दीजिए, फिर रांची को ज्ञान दीजिए। झारखंड के युवा अब राजनीतिक भाषण नहीं, पारदर्शी परीक्षा, निष्पक्ष जांच और रोजगार चाहते हैं।”
