सरला बिरला पब्लिक स्कूल में भक्तिभाव और सांस्कृतिक रंगों के साथ जन्माष्टमी का भव्य उत्सव


सरला बिरला पब्लिक स्कूल, रांची में जन्माष्टमी का पावन पर्व अत्यंत उत्साह, श्रद्धा एवं सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर संगीत, नृत्य, कथा-वाचन और मनमोहक झाँकियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य व्यक्तित्व एवं उनकी मनोहारी लीलाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

विशेष प्रार्थना सभा का शुभारंभ मंगलाचरण एवं ईश्वर की वंदना से हुआ। इसके पश्चात् विद्यार्थियों ने जन्माष्टमी के महत्त्व तथा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके शाश्वत संदेशों पर आधारित प्रेरणादायक भाषण एवं कथा प्रस्तुत की। विद्यालय परिसर भक्तिमय वातावरण से ओत-प्रोत हो उठा, जब विद्यार्थियों ने “मैं भी कान्हाध्कान्हा की राधा” विषयवस्तु के अंतर्गत राधा और कृष्ण का रूप धारण कर लयबद्ध संगीत पर मनमोहक एवं आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया।

सुंदर ढंग से सजाई गई कृष्ण-थीम आधारित झाँकी ने समारोह की भव्यता को और बढ़ा दिया। झाँकी में गोकुल की मनोहारी छवि तथा बाल कृष्ण की मनमोहक लीलाओं को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया। समारोह का प्रमुख आकर्षण पारंपरिक मटकी फोड़ पर आधारित जोशपूर्ण नृत्य प्रस्तुति रही, जिसने पूरे वातावरण को उमंग, ऊर्जा और उल्लास से भर दिया।

यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं उनकी शिक्षाओं से जुड़ने का अवसर भी प्रदान किया। सत्य, साहस, करुणा, कर्तव्यनिष्ठा, विवेक और भक्ति जैसे जीवन-मूल्यों को विद्यार्थियों तक प्रभावशाली ढंग से पहुँचाया गया।

इस अवसर पर प्राचार्या श्रीमती मनीषा शर्मा ने कहा, “जन्माष्टमी हमें स्मरण कराती है कि भगवान श्रीकृष्ण की वास्तविक महत्ता केवल उनके दिव्य एवं मनमोहक स्वरूप में नहीं, बल्कि उनकी गहन जीवन-दृष्टि और अमूल्य शिक्षाओं में निहित है। मैं अपने विद्यार्थियों को प्रेरित करती हूँ कि वे अपने दैनिक जीवन में सत्य, साहस, करुणा और निष्काम कर्म जैसे मूल्यों को आत्मसात करें। वे चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ करना सीखें, अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करें और सदैव धर्म एवं सत्य के मार्ग पर चलने का प्रयास करें।”

जन्माष्टमी का यह भव्य समारोह आनंद, उल्लास और भक्तिभाव के वातावरण में संपन्न हुआ। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के शाश्वत संदेश ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे जीवन में प्रेम और करुणा को अपनाएँ, साहस के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें और सदैव सत्य एवं धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ें।

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