
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), राँची में लगातार गहराती शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के खिलाफ आदिवासी छात्र संघ ने एक बार फिर छात्रहित की बुलंद आवाज उठाई। संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री माननीय श्री सुदिव्या कुमार सोनू से मुलाकात कर विश्वविद्यालय की गंभीर समस्याओं से अवगत कराया तथा छात्रहित से जुड़ा विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व DSPMU के सचिव सीमा मुर्मू भी शामिल थीं।
मुलाकात के दौरान अध्यक्ष विवेक तिर्की ने स्पष्ट और दो टूक शब्दों में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय लंबे समय से शैक्षणिक अव्यवस्था, प्रशासनिक उदासीनता तथा छात्रों के अधिकारों की अनदेखी का शिकार रहा है। इसका सीधा दुष्प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई, शोध, रोजगार और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी छात्र संघ किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के अधिकार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शी प्रशासन और विश्वविद्यालय की गरिमा की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। छात्रहित से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अध्यक्ष विवेक तिर्की ने मंत्री के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें मजबूती से रखीं—
1. कुड़ुख (उरांव), संथाली, नागपुरी, झारखंडी जनजातीय विभाग तथा BBA, MBA, कंप्यूटर विज्ञान एवं वाणिज्य (कॉमर्स) विषयों में की गई सीटों की कटौती तत्काल वापस ली जाए तथा झारखंडी एवं जनजातीय भाषाओं के साथ हो रहे भेदभाव को समाप्त किया जाए।
2. अपने पद का दुरुपयोग कर गैर-शैक्षणिक अथवा राजनीतिक गतिविधियों में संलिप्त शिक्षकों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा जांच पूरी होने तक उन्हें किसी भी प्रशासनिक एवं शैक्षणिक दायित्व से दूर रखा जाए।
3. विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु तत्काल बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू की जाए।
4. छात्रों के विरुद्ध दर्ज सभी झूठे एवं निराधार मामलों एवं शिकायतों को तत्काल वापस लिया जाए।
5. AICTE से संबंधित सभी पाठ्यक्रमों की आवश्यक मान्यता एवं अनुमोदन प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए।
6. विश्वविद्यालय में “एक व्यक्ति–एक पद” के सिद्धांत को प्रभावी एवं पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए।
मंत्री माननीय श्री सुदिव्या कुमार सोनू ने प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों को गंभीरता से सुना और उन्हें छात्रहित से जुड़ा एवं उचित बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले कुछ महीनों के भीतर छात्रसंघ चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है। साथ ही विश्वविद्यालय में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसे शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नियमित पाठ्यक्रमों का विस्तार आवश्यकता के अनुसार किया जाएगा तथा विशेष रूप से कुड़ुख (उरांव) विभाग में सीटों को पुनः बहाल करने की दिशा में सकारात्मक पहल की जाएगी।
शिक्षा मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर सरकार गंभीरता से आवश्यक कार्रवाई करेगी तथा विश्वविद्यालय में बेहतर शैक्षणिक एवं प्रशासनिक वातावरण स्थापित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
मुलाकात के बाद अध्यक्ष विवेक तिर्की ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं करती है तो आदिवासी छात्र संघ छात्रहित की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना आंदोलन और अधिक तेज करेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय किसी की निजी जागीर नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के सपनों का केंद्र है। छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ या प्रशासनिक मनमानी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने दोहराया कि आदिवासी छात्र संघ आगे भी विद्यार्थियों के अधिकार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शी प्रशासन तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा की रक्षा के लिए पूरी मजबूती और जिम्मेदारी के साथ संघर्ष करता रहेगा।
