
झारखंड सरकार ने अब सड़क निर्माण में लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों और संवेदकों के खिलाफ बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है।
रांची में आयोजित ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज विभाग की मैराथन समीक्षा बैठक में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने साफ निर्देश दिया कि जो एजेंसियां लंबे समय से सड़क और पुल निर्माण का काम पूरा नहीं कर रही हैं, उन्हें अब नया काम मिलना आसान नहीं होगा।

बैठक में सामने आया कि कई जिलों में सड़क निर्माण योजनाएं वर्षों से लंबित हैं। कई संवेदकों के पास एक साथ कई प्रोजेक्ट हैं, लेकिन समय सीमा के बावजूद काम अधूरा पड़ा है। मंत्री ने अधिकारियों को राज्य स्तर पर ऐसी एजेंसियों की सूची तैयार कर उन्हें डिबार करने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया।
सरकार ने यह भी माना कि कुछ एजेंसियां जानबूझकर काम में देरी कर रेट रिवीजन का फायदा लेने की कोशिश करती हैं। अब विभाग ऐसी योजनाओं की भी जांच करेगा।

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने विधायकों की शिकायतों पर तय समय में कार्रवाई करने और सिर्फ कागजी खानापूर्ति के बजाय वास्तविक जांच सुनिश्चित करने को कहा।
बारिश से पहले क्षतिग्रस्त पुलों की सूची तैयार कर उनकी मरम्मत तेज करने का भी निर्देश दिया गया है।
वहीं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा में राज्य के छह जिलों में पलाश मार्ट के लिए जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया तेज करने की बात कही गई। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ स्वयं सहायता समूह तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें उद्यमिता से जोड़ना है।
अबुआ आवास योजना को लेकर भी सरकार ने अंतिम किस्त जल्द जारी कर लाभुकों का घर बनाने का सपना पूरा करने पर जोर दिया। इस योजना के लिए बजट में 4100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य में स्वयं सहायता समूहों की संख्या 3 लाख 19 हजार तक पहुंच चुकी है, जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
ग्रामीण विकास सचिव मनोज कुमार ने जिला स्तर से अधूरे सड़क निर्माण कार्यों की सूची मुख्यालय भेजने और रेट रिवीजन पर नई SOP तैयार करने की बात कही।
बैठक में मनरेगा आयुक्त मृत्युंजय बरनवाल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

