
रघुवर दास पहले अपने कार्यकाल में जेपीएससी का हिसाब दें, फिर छात्रों की चिंता का ढोंग करें : ऋषीकेश सिंह
भाजपा के शासनकाल में हुई लगभग हर जेपीएससी परीक्षा विवादों, सेटिंग और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रही – कांग्रेस
झारखंड महागठबंधन सरकार ने देश का सबसे कड़ा परीक्षा कानून बनाया, भाजपा ने किया था विरोध – ऋषीकेश सिंह
राँची,
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव सह प्रवक्ता ऋषीकेश सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के बयान को पूरी तरह राजनीतिक और तथ्यहीन बताते हुए कहा कि जेपीएससी और नियुक्ति प्रक्रिया पर बोलने का नैतिक अधिकार भाजपा ने अपने शासनकाल में ही खो दिया था।
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि रघुवर दास को याद रखना चाहिए कि उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान आयोजित 6वीं जेपीएससी सहित कई नियुक्ति प्रक्रियाएं गंभीर विवादों में रहीं। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तक अनेक अनियमितताओं के आरोप लगे। उस दौर में यह धारणा बनी कि प्रभावशाली नेताओं, अधिकारियों और पैसे वाले परिवारों के लोगों को प्राथमिकता देकर नियुक्तियां कराई गईं। कई मामलों की जांच हुई, मुकदमे चले और अनेक अधिकारी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आए। ऐसे रिकॉर्ड के बाद भाजपा को युवाओं को नैतिकता का पाठ पढ़ाने का कोई अधिकार नहीं है।
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार समय पर जेपीएससी परीक्षाएं कराने में भी पूरी तरह विफल रही, जिसके कारण हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। यही कारण था कि झारखंड के युवाओं ने 2019 में भाजपा की कार्यशैली के खिलाफ अपना जनादेश दिया।
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में परीक्षा में पारदर्शिता की पक्षधर होती तो झारखंड प्रतियोगिता परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 का विरोध नहीं करती। महागठबंधन सरकार द्वारा बनाए गए इस कानून में पेपर लीक, नकल और भर्ती में धांधली करने वालों के लिए 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा तथा ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यह देश के सबसे कठोर परीक्षा कानूनों में से एक है।
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि महागठबंधन सरकार का स्पष्ट सिद्धांत है कि जहां भी किसी परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में शिकायत आती है, वहां जांच और कार्रवाई तत्काल शुरू की जाती है। यही पारदर्शिता का प्रमाण है। आज झारखंड में सामान्य और गरीब परिवारों के युवाओं को भी योग्यता के आधार पर अवसर मिल रहे हैं।
ऋषीकेश सिंह ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि देश में पिछले 12 वर्षों में 152 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे 7 करोड़ से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए और लाखों परिवारों का समय, मेहनत और पैसा बर्बाद हुआ। ऐसे में भाजपा को आत्ममंथन करना चाहिए, न कि झूठे आरोप लगाकर अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाना चाहिए।
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला, उत्तर प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप, बिहार की भर्ती परीक्षाओं के विवाद तथा देश के विभिन्न राज्यों में सामने आए पेपर लीक के मामले यह साबित करते हैं कि भाजपा को भ्रष्टाचार और भर्ती प्रक्रिया पर भाषण देने से पहले अपना इतिहास देखना चाहिए।
प्रदेश सचिव सह प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है कि किसी भी परीक्षा में अनियमितता करने वाले व्यक्ति को, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन भाजपा का दोहरा चरित्र यह है कि केंद्र की विफलताओं पर वह चुप रहती है और झारखंड में केवल राजनीतिक लाभ के लिए बयानबाजी करती है।
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि झारखंड के युवा भाजपा का इतिहास नहीं भूले हैं। भाजपा शासन में देरी, विवाद और कथित सेटिंग वाली नियुक्तियां चर्चा का विषय थीं, जबकि महागठबंधन सरकार ने व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में कानून और संस्थागत सुधार किए हैं।
