संविधान बड़ा या नफरती बयान? भाजपा नेता भानु प्रताप शाही की ‘तालिबानी’ सोच पर झारखंड मुस्लिम युवा मंच का कड़ा प्रहार

रांची: झारखंड मुस्लिम युवा मंच के अध्यक्ष **मोहम्मद शाहिद अय्यूबी** ने भाजपा नेता और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही द्वारा हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई विवादित टिप्पणियों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा सार्वजनिक मंच से हिंसा को उकसावा देना और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना भारतीय लोकतंत्र और झारखंड की ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ पर सीधा हमला है।

संविधान सर्वोपरि, नफरती एजेंडा नहीं
शाहिद अय्यूबी ने स्पष्ट किया कि भारत का संविधान किसी व्यक्ति की इच्छा से नहीं, बल्कि कानून के शासन से चलता है। उन्होंने भानु प्रताप शाही को संविधान की याद दिलाते हुए कहा:
अनुच्छेद 25:हर नागरिक को अपने धर्म को मानने और उसके अनुसार आचरण करने की स्वतंत्रता देता है। शरीयत के अनुसार व्यक्तिगत कानूनों का पालन करना इसी संवैधानिक अधिकार का हिस्सा है।कानून का शासन:यदि किसी पत्रकार के साथ कोई अप्रिय घटना हुई है, तो उसके लिए पुलिस और अदालतें मौजूद हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद कानून को अपना काम करने देना चाहिए, न कि जनता को हिंसा के लिए भड़काना चाहिए।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि पत्रकारों को अंडा, जूता और चप्पल फेंकने जैसी हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान है। अय्यूबी ने सवाल उठाया, *”क्या जूता और अंडा चलाना भारतीय परंपरा है? एक तरफ वे दूसरों को ‘तालिबानी’ कहते हैं और दूसरी तरफ खुद वैसी ही हिंसक प्रवृत्तियों को बढ़ावा दे रहे हैं।”

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
झारखंड मुस्लिम युवा मंच ने प्रशासन से मांग की है कि भड़काऊ भाषण देने और सामाजिक शांति भंग करने की कोशिश के मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। मंच ने दोहराया कि देश बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान से चलेगा, किसी के नफरती एजेंडे से नहीं।

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